ब्रज की दुनियां
ऐसे-ऐसे दिना मत दिखावै प्रभू,
चों तू मूरख समझ कें डरावै प्रभू,
मोकूं भारी परै जि धरम संकला,
खोटी दुनियां निरन्तर सतावै प्रभू,
पापी दुष्टात्मा नर्क गामी अधम,
ऐसौ-ऐसौ डरप कें दिखावै प्रभू,
रात दिन कोस रस्ता के गिनतौ रहै,
द्वार तक तेरे चलकें न आवै प्रभू
कोऊ बिपदा परै तो मेरी जीभ पै,
कृश्न मोहन मुरारी ही आवै प्रभू,
मैंने हर गैल इकली चली रामजी,
ना तौ पूछी न कोऊ बतावै प्रभू,
तैनें कितनी लई हैं परीक्षा मेरी,
मोपै नैकउ बनावट न आवै प्रभू,
सिर्फ़ कोशिश जि है, राह चलती रहूं,
चाहै कुछ भी न आवै न जावै प्रभू,
उर्मिला माधव
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