ब्रज की दुनियां
बेमतलब कौ स्वांग रचानों पड़ रौ है,
सब इम्लिन कूं आम बतानों पड़ रौ है...
इज्जत वारेन की तौ लुटिया डूब रही,
अपनों कद और मान घटानों पड़ रौ है
सब दुनियां के ढोंग समझ कें बैठे हैं,
दुनियां भर कूं नाम बतानों पड़ रौ है..
नैकउ रस्ता बचौ कहाँ अब चलिबे कूं
सब रस्तन के बीच जमानों पड़ रौ है..
और अपोजीसन कितनों है पावैगौ
भ्र्ष्टाचार ते ध्यान हटानों पड़ रौ है...
दैया चिल्ली भारी मच गई लोगन में,
अपने घर कूं लौट कें जानों पड़ रौ है..
उर्मिला माधव
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