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चलनों सीखौ

सब ते पहलें तौ कॉंटेन पै चलनों सीखौ,
सूरज की तरियां ते रोज निकलनों सीखौ,

भारी-भारी व्यंगन ते जब हार रहे हम,
दुनियां की चोटन ते रोज संभलनों सीखौ,

जी पै जैसी बीती ऐ वो तुम का जानों
कैसें अपने गम ते रोज निकलनों सीखौ,

मनुआं जब मायूस भयौ तौ रोअन लगे हम,
कैसेऊँ अपने जी कूँ रोज बदलनों सीखौ,

जीउ बावरौ दुनियांदारी नईं जानें बस,
कभू-कभू का,रोजई हमनें जलनों सीखौ..
उर्मिला माधव

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