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कारगुजारी है

सब की सब दुनियां की कारगुजारी है
हमनें जेई दुनियां रोज बिड़ारी है,

रोज उठै उत्पात बिना ही मतलब कौ,
अपने घर की रोजई बात बिगारी है,

कैसें अपने घर कौ द्वार बचाऔगे
सबनें मिलकें घर की भीत उखारी है,

अबकें ही दुनियां कौ ढर्रा समझौ है,
सोच समझि कें घर की आब उतारी है,

जाकूँ देखौ, झोली लै कें डोल रह्यौ,
जाकी देखौ ताकी मत, मतवारी है,

दूर ते देखें खूब तमासौ दुनियां कौ
खूब समझ कें इक तरकीब निकारी है..
उर्मिला माधव

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मुस्कील ते

ब्रिज ग़ज़ल जिंदगी कट रही है मुस्किल ते, भागि जामेंगे, तेरी महफिल ते, सांस लैनौ भी एक जुआ सौ है, कैसें जीतेंगे काऊ आदिल ते, कितनी तक़लीफ़ है करेजा में, पूछ कें देखियों तौ बिस्मिल ते, नाव काग़ज़ की देह आफ़त सी, कितनी गहराई पूछें साहिल ते, हम कूं दूरी बताऔ मंजिल की, दूनी हिम्मत करिंगे हम दिल ते, उर्मिला माधव 28.3.2018

अपनों आप बनानौं होगौ

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प्रीत की रीत निभावै

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