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नाच न जानें , आंगन टेढ़ौ ।।

मती करौ तुम तेरौ मेरौ,
हिया सरम की कछू तौ हेरौ,

दुनिया वारे सदा एक से,
बिनकी माऊं नजर मत फेरौ

चेत जाऔ सब अबई बखत है,
मूड़ पै बादर घिरौ घनेरौ,

मन की बात उजग्गर कहि दई,
भीतर ते सब मेल कढ़ेरौ,

भाज ठड़ौ हो,सबन ते बच कें,
काउ कूँ इतनों भी मत घेरौ,

सब प्राणिन में कमी निकारै,
नाच न जानें आंगन टेधौ
उर्मिला माधव

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