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जाकौ इनाम का है

ब्रिज की दुनियां 

निक सामरे बतइयो, दुनिया में काम का है,
अब तक लौं जी रहे हैं, जाकौ इनाम का है,

कितनों बिगार होगौ, दुनियां में आदमी कौ,
अइयो तनिक बतइयो, जे ताम झाम का है,

चों बाबरौ बनाबै, कान्हा तू हम सबन कूँ,
छलिया मरे जनम के, "अब" तेरौ नाम का है,

सब ढूंढ़ते फिरें हैं, तोकूँ, गली गलिन में,
तू आजकल कहाँ है, और तेरौ धाम का है,

अब तू भी सुन लै कान्हा,टेरत रहंगे हमऊ,
ठाड़े रहेंगे दिन भर, छइयां ऑ घाम का है,

व्यभिचार बढ़ गयौ है, आनौं परैगौ तोकूँ, 
तू भेस धरकें आजा, किसना ऑ राम का है,
उर्मिला माधव

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