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विनेश फोगाट

बेमतलब कूँ दियौ बिड़ार,
हम में इतनों है गयौ भार?

मात पिता की आसा टूटी,
जी पै है गयौ अत्याचार,

टूंक टूंक है गयौ करेजा,
कुल जीवन कौ कियौ बिगार,

रखियो किसना लाज हमारी,
संकट ते अब तूई उबार,

कैसें समझामें हम खुद कूँ,
मचौ है जी में हाहाकार,

भीतर भीतर तोय पुकारूं,
अबकें सुन लै ओ करतार..
उर्मिला माधव
 

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