2 अक्टूबर
ब्रज की दुनियां
सेंत मेंत में प्रेम भाव कौ खर्चा नईं भावै
बापू जी मोकूं, चरचा नईं भावै,
भंक व्याप रई दुनियां में अब कोउ न पूछन हार,
खंड खंड भारत करिवे कूं खड़ी करें दीवार,
कहा कहें हम वृथा प्रेम कौ खर्चा नईं भावै,
बापू जी मोकूं चर्चा नईं भावै
भूकन मरें गरीब कहूं कंहुँ, दौलत अपरमपार,
कहा बतामें तुमकूं कितनों व्यापक भ्रष्टाचार,
जाई बात सूं प्रेम भाव कौ खर्चा नईं भावै
बापू जी मोकूं चरचा नईं भावै,
उर्मिला माधव
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