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आपनें अपनों सम्हारौ आप बस

ब्रज की दुनियां

आपनें अपनों सम्हारौ आप बस,
और सबकूं दै दियौ संताप बस,

आपा पूती कर दई बौहार में,
जाना मानी में कियौ है पाप बस,

जी हमारौ खूब दूखौ है प्रभू
हमई ए जो ना दियौ है साप बस,

हमपै जब बर्दाश्त हरगिज ना भई
तब हमारे जी कूँ चढ़गौ ताप बस,

हम गुहारें राम कूँ वो कब सुनै,
मन ई मन में कर रहे हैं जाप बस,

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