नहीं तुमकूं हमारी इक अना के रूठबे कौ डर, हमें भी चों रहैगौ, जा के,बा के रूठबे कौ डर, अबई तक गैर की खातिर मरौ ऐ कौन दुनियां में, कहाँ आँखन में अब बाक़ी हया के रूठबे कौ डर ? बड़ी मछली ते ब...
हकीकत बबा जू,समझनी परैगी, मजा की सजा तौ,भुगतनी परैगी, न बैय्यर की इज्जत है मिसरी कौ ढेला, जि गोली कुनैनी,गटकनी परैगी, घड़ी तुमनें बांधी है,सोने की मन भर, तौ लोहेउ की तुमकूँ पहरनी ...
बिगर बरसात के रहबै, चमन के रूठबे कौ डर कहूँ जो ब्यार चल बाजी, घटन के रूठबे कौ डर खड़े हैं मोर्चा पै रात दिन सैनिक हमारे लैं, रहै हर दम करेजा में, वतन के रूठबे कौ डर जमाने भर की चिंता...
ब्रिज ग़ज़ल जब मेरी ज़िन्दगी मोपे भारी भई, तब शरण मैं बिहारी तिहारी भई, दुनियां बारेन्ने समझी बिचारी हूँ मैं, घर ते बाहिर ते बिलकुल निकारी भई, जानि केँ मैंने छोड़ी धरम संकला सब स...
मित्रता दिवस कूँ समर्पित--- संग-संग जो डोल रहे ऐं भीर परी तौ, कोऊ न होगौ, हम ऐसे अनमोल रहे ऐं, हमन सरीखौ,कोऊ न होगौ जब-जब बिपत परी मित्रन पै, ठाड़े रहे बराबर ते हम, हमें भौत जो तोल रहे ऐ...
छूट जानौ है ये जमानौ सब, बात सांची है बात मानौ सब, जाकौ जितनों गुमान भारी है, बोझ ऊ वा ही कूँ उठानौ सब, जे जो मिथ्या है, सिर्फ़ दुनियां है, शाश्वत ही है आनौ-जानौ सब, एक दिन सब सफर पे चल ...