Skip to main content

Posts

Showing posts from August, 2019

रूठबे कौ डर

नहीं तुमकूं हमारी इक अना के रूठबे कौ डर, हमें भी चों रहैगौ, जा के,बा के रूठबे कौ डर, अबई तक गैर की खातिर मरौ ऐ कौन दुनियां में, कहाँ आँखन में अब बाक़ी हया के रूठबे कौ डर ? बड़ी मछली ते ब...

बबा जू

हकीकत बबा जू,समझनी परैगी, मजा की सजा तौ,भुगतनी परैगी, न बैय्यर की इज्जत है मिसरी कौ ढेला, जि गोली कुनैनी,गटकनी परैगी, घड़ी तुमनें बांधी है,सोने की मन भर, तौ लोहेउ की तुमकूँ पहरनी ...

रूठबे कौ डर

बिगर बरसात के रहबै, चमन के रूठबे कौ डर कहूँ जो ब्यार चल बाजी, घटन के रूठबे कौ डर खड़े हैं मोर्चा पै रात दिन सैनिक हमारे लैं, रहै हर दम करेजा में, वतन के रूठबे कौ डर जमाने भर की चिंता...

बिहारी-तिहारी

ब्रिज ग़ज़ल जब मेरी ज़िन्दगी मोपे भारी भई, तब शरण मैं बिहारी तिहारी भई, दुनियां बारेन्ने समझी बिचारी हूँ मैं, घर ते बाहिर ते बिलकुल निकारी भई, जानि केँ मैंने छोड़ी धरम संकला सब स...

बदल

हरेक सम्त हमें ग़म दिखाई देता है, अब अपनी आंख का नक्शा बदल लिया जाए, उर्मिला माधव

कोऊ न होगौ

मित्रता दिवस कूँ समर्पित--- संग-संग जो डोल रहे ऐं भीर परी तौ, कोऊ न होगौ, हम ऐसे अनमोल रहे ऐं, हमन सरीखौ,कोऊ न होगौ जब-जब बिपत परी मित्रन पै, ठाड़े रहे बराबर ते हम, हमें भौत जो तोल रहे ऐ...

जमानों सब

छूट जानौ है ये जमानौ सब, बात सांची है बात मानौ सब, जाकौ जितनों गुमान भारी है, बोझ ऊ वा ही कूँ उठानौ सब, जे जो मिथ्या है, सिर्फ़ दुनियां है, शाश्वत ही है आनौ-जानौ सब, एक दिन सब सफर पे चल ...