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Showing posts from August, 2017

बबाजू

हकीकत बबा जू,समझनी परैगी, मजा की सजा तौ,भुगतनी परैगी, न बैय्यर की इज्जत है मिसरी कौ ढेला, जि गोली कुनैनी,गटकनी परैगी, घड़ी तुमनें बांधी है,सोने की मन भर, तौ लोहेउ की तुमकूँ पहरनी परैगी, बो सोने के बिस्तर,ऑ चांदी के तकिया, न मिलने ऐं, आदत बदलनी परैगी, जुआँ तेरी डाढ़ी में डोलिंगे बाबा, जे दाढ़िउ तौ दारी, कतरनी परैगी, न पहलें उतारौ जे कारौ सौ चश्मा, तौ चश्मा बिगर, गैल चलनी परैगी, जे फंदा लहैं कौ, दहैं ते कटैगौ, जो करनी करी ऐ तौ,भरनी परैगी.. उर्मिला माधव, 26.8.2017

कैह दई ऐ

क मतला दो शेर---  हम पे जैसी आई हमने कैह दई है,  बात हती सो सबके आंगें धै दई है,  पूरौ जीवन यार बितायौ भटकन में  बच्चन कूँ अब एक टपरिया लै दई है,  अपन राम तौ भये फकीरी में राजी  तीन लोक ते मथुरा न्यारी कैह दई है...  #उर्मिलामाधव  18.10.2015

जरतौ रह्यौ

जिंदगी भर जो गुरूरी आग में जरतौ रह्यौ, मर्द और बईयर में खाली फर्क ही करतौ रह्यौ, कैसे-कैसे हैं परेखे मेरे मन में का कहूँ, भीतरई-भीतर करेजा टूट कें गिरतौ रह्यौ, माँ बहन बेटी हतीं सबरी घरई में ताऊ पेँ, अपनी दुनियां में अकेलौ आप ही मरतौ रह्यौ, मेरी बातन में छुपौ है जिंदगी कौ सार सब, आत्म कलुषित मांस्स अपने आप ते डरतौ रह्यौ, ऐसी दुनियां देखि कैं जे चित्त उचटत जातु ऐ, यों समझ लेओ जीउ मेरौ आह सी भरतौ रह्यौ.. # उर्मिलामाधव .. 18.10.2015

कहा बिगारौ ओ मैंनें

आँखिन मैं आंसू चों दै दये,तेरौ कहा बिगारौ हो मैंनें, जब भीतर तक तू टूट गयौ,तब दयौ सहारौ हो मैंने, मोकुं सुधि तेरी आमति ऐ काऊकी बात न भामति ऐ, जिन बैर करै मत तू इतनौ,तेरौ कहा उजारौ हो मैनें, # उर्मिलामाधव .. 16.11.2015

धल्लेओ तुम

एक मतला दो शेर ----- जीत कें हारी है हमनें,ज़िन्दगी,धल्लेओ तुम, जे बड़ो अहसान,काऊ और पै,कल्लेओ तुम, वार दीन्हीं अपनी सबरी ज़िन्दगी गैरन पै बस, अपनी-अपनी राजी है,जी चाहे सो कल्लेओ तुम, सांस जब तक चल्लई है,हम न बदलिंगे,कभू , जो तुम्हें अच्छौ लगे तौ अपनौ घर भल्लेओ तुम, # उर्मिलामाधव ... 26.11.2015

राजनीति

राजनीति कौ किस्सा भैया गजलन में मत लईयों बस, जितनौ हमकूं हजम है सकै उतनौई पाठ पढईयों बस, रोटी पानी भूल गए सब,गईयन की है फिकिर लगी, डरप रहे हैं सब घर बारे,नौहरे तक मत अईयों बस, जाति वाद के ढोंगन में तौ,मेरौ नांय समर्थन जी, धरम-करम के नाम,जिनावर,बलि मत कहूँ चढ़ईयों बस, खेती करौ मजूरी कल्लेओ,या फिर करौ नौकरी कऊं, खून पसीना की ही खईयों,चोरी की मत खईयों बस, निरी तरह के आकर्षण हैं,दुनियां में जंजाल बौहौत, अपनौ आप सम्हारै रखियों,कहूँ भटक मत जईयों बस, दुनियां की का होड़ करौगे,दुनियां तौ फिर दुनियां है, शिष्टाचार निभईयों अपनौ ,औरन पै मत जईयों बस... # उर्मिलामाधव ... 2.12.2015

आंती हैं

एक मतला,एक शेर----  जो लड़कपन ते एक जमाती हैं  बेऊ एक दूसरे ते आंती हैं,  कौन ते बोलिबे कूँ जाऔगे,  सब तौ, परमात्मा के नाती हैं,  #उर्मिलामाधव,  23.12.2015  एक जमाती --- एक ही कक्षा में 6 Comments

समझावत है

मइया मोकूँ रोज-रोज समझावत है, लौट फेर केँ बाई की सुधि आवत है, सबते छुपकें चढ़ केँ गई अटरिया पै, सइ संजा ते मन मेरौ घबरावत है, सब दुनियां के पीयु घरई में हैं आली, मेरौ मन बिरहा कौ राग अलापत है, कल्ल पड़ोसी बाबा मोते पूछ उठे, बे मतलब चौं आंसू रोज बहावत है, दूर देस में रहिबे बारे आजा अब, मौसम न्यारौ मोपै ताने मारत है, # उर्मिलामाधव .. 14.1.2016

चौखट है

एक मतला तीन शेर... सब दुनियां ते न्यारी तेरी चौखट है, बंसी बारे,दुनियां तेरी बदौलत है, मोर पंख ते सजौ भयौ दरबार बहौत, दरबज्जे पै खूब बज रही नौबत है, ढोल नगाड़े खूब बजत हैं आँगन में, मर्द कृष्ण हैं,राधा एक-एक औरत है, जब ते पैदा भये तब ई ते संग लगी, विरह वेदना बृज बासिन की दौलत है... # उर्मिलामाधव .. 14.1.2016

नारि करी ऊंची

महिला दिवस इन बातन में कछु नाय धरौ,इक दिन कूँ नारि करी ऊंची, बाहिर में नारे ख़ूब लगे,पर भीतर लाय धरी,दूंची, दिन रात तौ घर के काम करै, पर ता की गिनती कौन करै, हां इतनी किरपा जरूर करी,कुल काम पै, फेर दई कूँची... उर्मिला माधव.. 8.3.2016

कैसें आंकौ जायगौ

प्रेम कौ अनुपात आखिर कैसैं आंकौ जायगौ, यों बताऔ, मन के भीतर कैसैं झाँकौ जायगौ, पीर कौ अनुमान अब तक कौन कर पायौ कहौ, एक ही लठिया ते कैसे प्रेम हाँकौ जायगौ, आँख के आँसुंन ऐ तौ तुम हाथ ते ढकि लेओगे, घाव की दुनियां कौ हिस्सा कैसैं ढाँकौ जायगौ, जिंदगी भर राख चूल्हे की लगी रई हाथ में जे बताऔ और कब तक रेत फांकौ जायगौ, झालरी,झूमर सजा केँ, देह सुन्दर कर लई, कौन खन जे भाग मोतिन संग टांकौ जायगौ ? उर्मिला माधव.... 4.4.2016

लै जाऊँगी

ग़ज़ल..... मैं तुमें समसान तक लै जाउंगी, सच तुमें आँखिन ते मैं दिखवाउंगी, ऐसी सच्चाई लिखी है राख पै, खुद पढौगे मैं कहा पढ़वाउंगी, श्याम मुख हों या कि हों कर्पूर मुख, जे ई सबकौ अंत है समझाउंगी, देह मुर्दा,आग में जर जायगी कष्ट काया कौ कहाँ कह पाउंगी, यईं धरे रह जांगे, घर और जमीन, सच कहूँ तौ काहे पै इतराउंगी, उर्मिला माधव, 15.4.2016

हमई ए भिकारी

न घर ई हमारौ न दुनियां हमारी, पतौ जे चलौ कै हमईं ए भिकारी, इमारत तौ अब लौं धरी जों की तों ऐं, कै सांसई अचानक चली गई बिचारी, हबाके भरे जिन्ने दुनियां में ऊंचे, बेऊ मर कैं कित्ते भये भारी-भारी, जि निश्चित है सब कूँ ई मरनौ पडैगौ, कभू जाकी बारी,कभू बाकी बारी, जो कहनी ई हमकूं,सो कहि दई ऐ हमनै, तौ मानौ न मानौ है राजी तुम्हारी, सबै छोड़ जानौ है दुनियां कौ मेला, डरी यईं रहेंगी महलिया अटारी... उर्मिला माधव.... 11.5.2016...

कहें हम कौन तरियां ते

कहें हम कौन तरियां ते समझ में कैसें आवैगी, कमी-बेसी कछू भी हो,तौ जे दुनियां सिखावैगी? न हमने काऊ पै अंगुरी उठाई है अबई तक तौ बिना संबाई के दुनियां,कहा अंगुरी उठावैगी ? हमारौ जी तौ दुनियां ते,हमेसा ही अलग सौ हो, तौ फिर जे कौन सी दम पै हमें रस्ता बतावैगी ? तुम्हें जब गैल चलनी हो तौ अपने रंग में चलियों, अगर दुनियां की मानौगे तौ जे दुनियां नाचावैगी , है जब तक सांस तब तक कौ ही खेला ऐ सुनौ भैया, कहूँ जो सांस रुक गई तौ न आवैगी न जावैगी.... उर्मिला माधव... 3.6.2016..

बिगारे हैं

रात भर के मेह नै,तौ काम सब बिगारे ऐं,  सड़कन के खांचेन नै,कितने लोग मारे ऐं,  नैकऊ बिसात नाँय मांस्सन के जीवन की,  देखौ कैसे मौसम ने ...पांय अब उखारे ऐं...  उर्मिला माधव..  16.7.2016

इतरायौ भयौ है

कौनसी बातन पै इतरायौ भयौ ऐ, बाबरौ इनसान भरमायौ भयौ ऐ, फाऊं-फाऊं कर रह्यौ ऐ चार लंग कूँ, झूठ की दुनियां पै बौरायौ भयौ ऐ, होस में आजा,मरै मत लोभ ते रे, जोरिवे कौ भूत चों छायौ भयौ है, एक खन में सांस जे रुक जायगी बस, सत्य कौ परमान बिसरायौ भयौ ऐ, याद कर संतन की बानी, भूलगौ का ? सूर कौ, कबिरा कौ सब गायौ भयौ ऐ.. जाँ पै राजी आवै ताँ पै देख लै जा, गुनि जनन नै ज्ञान दरसायौ भयौ ऐ, उर्मिला माधव.. 20.7.2016

काम की न काज की

फ़ालतू की राजनीति,काम की न काज की, बैठ केँ कपार धुनौ,.....दुसमन अनाज की, भारत की भित्तिन में,...सेंध लग गयी सुनौ, कैऊ साल है गईं .जे बात है का आज की ? # उर्मिलामाधव .. 8.8.2016

हार जीत के तईं

जाकूँ देखौ जी रह्यौ ऐ, हार जीत के तईं, बात-बात पै सवार, मार पीट के तईं, मांसन ते मांस देखौ,लडिबे कूँ आमादा, कोसन तक राजी नायं, बात-चीत के तईं, नैकसी सी ज़िन्दगी ऐ, यईं डरौ रहैगौ सब, मार काट पै तुले ऐं........द्वार भीत के तईं, अपने बुजुर्गन की इज़्ज़त कौ ध्यान नाँय, झुकनौ तौ लाज़िमी ऐ, मान रीत के तईं, कितनौ गुमान भयौ,...मौरूसी संपदा पै, मन में न ठौर बाक़ी,....प्यार प्रीत के तईं, उर्मिला माधव.. 22.9.2016

नांय कछू

बे मतलब की इन बातन में नांय कछू ख़ूब है दुनियां पर ,हाथन में नांय कछू तरह-तरह के फूल लगा लए, बगिया में, एक तुलसी बिन घर आँगन में नांय कछू बिन्दाबन की धरती कितनी पावन है, पर कान्हां बिन अब कानन में नांय कछू, गोकुल बारे दूध-दही को,खेल खतम, माय जसोदा, अब माखन में नांय कछू, चित्त उचटगौ बे मतलब की दुनियां ते, चाहत बाक़ी अब जा मन में नांय कछू... उर्मिला माधव, 19.12.2016 8 Comments

सुरू तौ करौ

सुरू तौ करौ,सबकूँ सुननी परैगी, कै इक दिन जिही गैल चुननी परैगी, अबई होस में नानै जे दुनियां बारे, खियालन की दुनियां ऊ बुननी,परैगी, सकारें की संजा तौ हौनी है निस्चित, तौ फिर खोपड़ी अपनी धुननी परैगी, अबई का भई ऐ,अबई और होगी, तौ मनुआ में सिग बात घुननी परैगी, महलिया अटारी,.....डरे यंईं रहेंगे, जे झूठी ऐ दुनियां,बिसुननी परैगी, उर्मिला माधव.. 7.1.2017

कोरी आंधी है

बय्यर की आज़ादी, कोरी,आंधी है, पुरुष वर्ग कूँ बहुत बड़ी आज़ादी है, भई लड़ाई घर में,तब-तब बय्यर ने, पूरे घर की डोर ....प्यार ते बाँधी है, मधुरी बानी, बड़ी सयानी दुनियां में, जाकौ सबते बड़ौ उधारण गांधी है, धैर्य धर्म कौ परचम ऊंचौ नारी कौ, बागडोर भी देश की जा ने साधी है, ब्याह भयौ तौ, जियत ज़रा केँ मार दई, सब दुनियां ही औरत की अपराधी है, नारी कौ अपमान करें सब घर बाहर, मर्यादा की रेख ...कबऊं नईं फांदी है.. सीता और अनुसुईया जैसी नारिन कौ, देखौ पूरौ जीवन, ...निपट, जिहादी है, उर्मिला माधव, 3.3.2017

रंग लगाय कें का होगौ

आज बिरज में होरी रे रसिया.. मन कौ मैल धुबौ नईं नैकउ,रंग लगाय केँ का होगौ, प्यार न मन में छार बराबर,बात बनाय कें का होगौ, भीतर-भीतर गारी दै रये,संग नाच रये होरी में, कपट, ईर्ष्या,मिटौ न नैकउ,फाग सुनाय केँ का होगौ, चगन-मगन सब अपने काजें,औरन कूँ भये उपदेशक, प्रीत की रीत खुदऊ तौ सीखौ, गाल बजाय केँ का होगौ, माई-बाप कूँ पूछत नानें,भूखे ऎं कै प्यासे ऎं छप्पन भोग धरौ इक लंग कूं, थार सजाय केँ का होगौ, सुनौ कन्हैया,बृज सूनौ है,कहि देओ, फिर कब आऔगे? तबतक अपनी धरौ टपरिया, बिरज बसाय केँ का होगौ... उर्मिला माधव 12.3.2017

सम्हारै कोई

जमानों कितनों बिगरि गयौ ऐ, कै ख़ुद कूँ कितनों सम्हारै कोई, अजब-अजब से हैं माँस जग में,करेजा कितनों पजारै कोई, जिन्हें पजरिबे कौ शौक है बे,बिना ही मतलब पजर रये हैं, लिखौ ऐ जिनके करम में जरिबौ तौ बिनकूं कितनों बिडारै कोई, जे जिंदगानी है जामें भैया,हजार घटना लिखी भई ऐं, कै धीर धरनों परैगौ आखिर, तौ बोलौ कितनों,चिंघारै कोई? तुम अपने ग़म कूँ,जमाने भर में,अनहोंतौ जैसौ समझ रये हौ, सबई कौ खेला है एक जैसौ,तौ बोलौ कितनों पुकारै कोई, है कल्ल ही की सी बात हमनें कही कें इतनों न रोऔ भइया, समझनों ही जब न कोई चाहै ,तौ कैसें, कितनों सुधारै कोई, उर्मिला माधव, 2.6.2017

चलें

जब तक है जी कूँ आस न घबडामें और चलें, कितनेऊ हों अकेले तबऊ आमें और चलें, जीवन कौ का है आज हतै और कल नहीं, जो राजी ऐं जा बात पे, तौ आमें और चलें, भई ज़िन्दगी तौ गैल है मिलने हैं ,नए लोग, तौ बोलें इन्क़लाब सब मिल जामें और चलें, कर दीन्हों है कुम्हार नें,पूरौ ई अबा, ख़राब, कोऊ बात नाएँ जी कूँ यों समझामें और चलें, जीवन मिलौ है मांस कौ,उपकार की है बात, सक्षम भयौ अपुनपौ तौ इतरामें और चलें.. उर्मिला माधव, 15.7.2017

अनुपात में बराबर

सब राम ने बनाए अनुपात में,बराबर, औक़ात में बराबर,और जात में बराबर, हर लंग है अँधेरौ,बिल्कुल ही एक जैसौ, और रौशनी कौ जलवा परभात में बराबर जो बैर कर रए हैं,अपनों चलन है बिनकौ, हर बात कर रए हैं,यों ही बात में बराबर, बौहार अपनों रखियों, आटे में नौन जैसौ, ज्यो दार कूँ रखें हैं, हम भात में बराबर, यों मांस तौ न अपनी आदत ते,बाज आवै, करतार कर सकै है, एक रात में बराबर, उर्मिला माधव, 5.7.2017